मंगल भात पूजा

क्यों की जाती है मंगल की भात पूजा?

ग्रह पूजा में हर ग्रह की पूजन सामग्री भिन्न होती है। जिसमें मंगल की पूजा प्रसिद्ध है।  क्यों चढ़ाया जाता है। यह भोग है या श्रृंगार। दरअसल मंगल लाल ग्रह है, अग्नि का कारक  है, इसका एक नाम अंगारक भी है। यह तेज अग्नि से परिपूर्ण है। इसीलिए प्रभावित  कुण्डली के लोगों के स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन भी शामिल होता है।

मंगल को आक्रामकता, साहस और आत्मविश्वास के लिए मुख्य ग्रह माना जाता है और यह मुद्रा, संपत्ति, वैवाहिक जीवन, दुर्घटना, सर्जरी, संबंध, ऋण, बाल और हृदय से संबंधित समस्याओं से संबंधित मामलों पर मजबूत प्रभाव देता है मंगल को भात इसीलिए चढ़ाए जाते हैं, क्योंकि भात यानी चावल की प्रकृति ठंडी होती है। इससे शांति मिलती है और वह भात पूजन करने वाले पर कृपा करते हैं। ठंडक मिलने से दुष्प्रभाव स्वतः कम होते हैं। प्रभावित कुण्डली वाले जातकों को भी अपने खाने में चावल को शामिल करना चाहिए जिससे उनके स्वभाव में भी थोड़ी शांति और ठंडक आती है। क्रोध कम होता है। https://en.wikipedia.org/wiki/Ujjain

भात पूजन द्वारा मंगल ग्रह दोष की शांति

सम्पूर्ण विश्व में भारत देश के अंर्तगत मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में एक मात्र मंग्रल ग्रह का मंदिर है, जहॉं ब्रम्हाण्ड से ग्रह की सीधी किरणे कर्क रेखा पर स्थित स्वयंभू शिवलिंग के उपर पढती है, जिससे यह शिवलिंग ग्रह के प्रतीक स्वरूप में जाना जाता है तथा यहॉ पर पूजन, अभिषेक, जाप व दर्शन से दोष का निवारण होता है।

मंगल दोष निवारण पूजन द्वारा एक मात्र अवंतिका ( उज्जैन ) में ही सम्पन्न कराया जाता है। यहॉ विधिवत् भात पूजन कराने से ग्रह के दुष्प्रभाव में कमी आकर शुभ फलो की वृद्धि होती है। यहां शिवलिंग का भात पूजन कर शांति की जाती है। यही नहीं भगवान का कुमकुम और गुलाब या लाल पुष्पों से अभिषेक भी किया जाता है। भात पूजन से दोष का निवारण हो जाता है। व्यक्ति को इस शांति के बाद नौकरी और विवाह के साथ अन्य परेशानियां नहीं आती। https://en.wikipedia.org/wiki/Ujjain

भात पूजन की विधि

भात पूजन मे सर्वप्रथम गणेश गौरी पूजन के पश्चात नवग्रह पूजन के पश्चात् कलश पूजन एवं शिवलिंग रूप भगवान का पंचामृत पूजन एवं अभिषेक वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा किया जाता है. इसके पश्चात् भगवान की भात अर्पित कर आरती एवं पूजन किया जाता है जिससे पूजन करने वाले को विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है, भात पूजा दोष निवारण का प्रभावी एवं त्वरित उपाय है !

ग्रहों में मंगल का तीसरा स्थान प्राप्त है जिन जातकों की कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश स्थानों पर यदि मंगल हो तो जातक की पत्रिका मांगलिक कहलाती है । हर स्थान पर mars कभी भी अमंगल नहीं करतें उपरोक्त स्थानों पर ही कुछ समस्याऐ आती है जैसे विवाह में विलम्ब, ऋण -वृद्धि, सन्तान प्राप्ति में बाधा, राजनैतिक क्षेत्र में वर्चस्व में कमी, प्रशासनिक क्षेत्र में असफलता, भवन, भूमि, वाहन, धातु आदि के व्यवसाय में हानि इत्यादि कारणों से जातक हमेशा मानसिक व शारीरिक समस्याओं से ग्रसित रहता है।


दोष निवारण और सुख-शांति के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और भूमि का कारक माना जाता है। कुंडली में ग्रह की स्थिति का हमारे जीवन पर सीधा असर पड़ता है। यदि कुंडली में ग्रह मजबूत हो तो व्यक्ति साहसी और सफल होता है, लेकिन यदि ग्रह कमजोर हो या कुंडली में दोष ( Dosh) हो, तो जीवन में कई परेशानियां आने लगती हैं।

विवाह में देरी, प्रॉपर्टी के विवाद, कर्ज की समस्या और अत्यधिक गुस्सा मंगल के अशुभ होने के संकेत हैं। इन सभी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए मंगल के लिए दान को सबसे सरल और अचूक माध्यम माना गया है।

दान क्यों जरूरी है?
जब कोई ग्रह अशुभ फल दे रहा हो, तो उसका रत्न पहनने के बजाय उस ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। दान करने से ग्रह का नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। यदि आप मांगलिक हैं या मंगल की महादशा/अंतर्दशा से परेशान हैं, तो नियमित रूप से सही विधि द्वारा दान करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।

मंगल के लिए दान की मुख्य वस्तुएं
लाल रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए उनकी शांति के लिए मुख्य रूप से लाल रंग से संबंधित धातुओं का दान किया जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार नीचे दी गई सामग्रियों का दान कर सकते हैं:

लाल मसूूर की दाल: शांति के लिए मंगलवार के दिन लाल मसूूर की दाल का दान सबसे प्रभावी माना जाता है।

तांबे के बर्तन: तांबा की मुख्य धातु है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को तांबे के लोटे या बर्तन का दान करने से संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझते हैं।

लाल कपड़े और गुड़: मंगलवार को लाल रंग के वस्त्र, गुड़, गेहूं और केशर का दान करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रक्तदान (Blood Donation): चिकित्सा और ज्योतिष दोनों में रक्त का संबंध मंगल से है। यदि आपका स्वास्थ्य ठीक है, तो रक्तदान करना सबसे बड़ा व्यावहारिक दान माना जाता है।

हनुमान जी की सेवा: मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी के लड्डू का प्रसाद चढ़ाने और उसे लोगों में बांटने से मंगल दोष का प्रभाव खत्म होता है।

दान के नियम और सही समय
दान का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही समय और सही नियम के साथ किया जाए:

सही समय: मंगल ग्रह के लिए दान हमेशा मंगलवार के दिन सूर्योदय के बाद (सुबह के समय) करना सबसे उत्तम होता है।

सही पात्र: दान हमेशा किसी जरूरतमंद व्यक्ति, गरीब या किसी योग्य ब्राह्मण को ही आदरपूर्वक देना चाहिए।

श्रद्धा भाव: दान करते समय मन में कोई अहंकार नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरी श्रद्धा और सेवा का भाव होना चाहिए।

निष्कर्ष
अगर आप भी विवाह में आ रही रुकावटों या गृह क्लेश से परेशान हैं, तो उज्जैन में माँ कृपा ज्योतिष पूजन पाठ के माध्यम से अपनी कुंडली का सटीक विश्लेषण करवा सकते हैं। सही मार्गदर्शन में मंगल के लिए दान और उचित उपाय करके आप अपने जीवन को खुशहाल और समृद्ध बना सकते हैं।

WhatsApp Image 2026 07 14 at 21.58.03

संपर्क करें

माँ कृपा ज्योतिष पूजन पाठ
📍 उज्जैन, मध्य प्रदेश

📞 8770797747